आज मैंने एक जगह पढ़ा कि हमारे कान और नाक पूरी जिंदगी बढ़ते रहते हैं हम डर गए भाई हमारी नाक तो पहले से इतनी लंबी है बढ़ती रही तो फिर पता नहीं कहा चली जाएगी तो सोचा पता किया जाए कि क्या वाकई यह सच है?
जवाब है हाँ भी और ना भी अब इसके बारे में हमें बताया डॉक्टर कैलाश राय सिंह ने देखिये हमारे नाक और कान में होता है कार्टिलेज कार्टिलेज बना होता है इलास्टिकनुमा टिशू यानी की ऊतक से अब आसान भाषा में समझें तो यह रेशमी धागे होते हैं
इसे रबर बैंड की तरह समछे नरम होता है, खिचभी सकता है अब डॉक्टर साहब बताये की बढ़ता है अठारह से बीस साल तक की उम्र तक पर उम्र के साथ हमारा शरीर बदलता है कार्टिलेज के जो धागे है वो खुलने लगते हैं अब ग्रैविटी यानी वो ताकत जो सारी चीज़ो को नीचे जमीन की तरफ खींचती है
उसी की वजह से धागे भी नीचे की तरफ उतरने लगते हैं अब अपना कान इतना सा अपनी नाक भी इतनी सी ये धागे बिचारे खुलकर कहा जाएंगे बार तो तैयार नहीं सकते स्किन के अंदर है तो ये कान के नीचे के भाग में और नाक के नीचे के भाग में लटक जाते हैं
नतीजा आपके कान नीचे से खींचते हैं और यही सेम चीज़ आपकी नाक के साथ भी होती है साथ ही उम्र के साथ चेहरे की जो मांसपेशियां हैं, जो मसल्स है, जो सेल्स है, ये सब कमजोर पड़ने लगते हैं, स्किन और उसके पीछे हड्डी के बीच में बफ़र जो है वो कम हो जाता है तो स्किन चिपकने लगती है हड्डी से और इस सब का खेल यह है
कि आप का जो चेहरा है वो सिकुड़ने लगता है आपको छोटा लगने लगता है और आपकी जो नाक है और कान हैं वो बड़े लगने लगते हैं समझे
