#1 Latest Diabetes होने से पहले लोगों को होती है Pre Diabetes, जानें इसके लक्षण |

person using disposable syringe put specimen on blue and white glucose meter
                                                                  Photo by Matt C on Unsplash
 

सूर्य छत्तीस साल के हैं अब एक महीने पहले उन्होंने एक नई कंपनी में नौकरी जॉइन की जॉइनिंग से पहले कंपनी ने उन्हें कुछ टेस्ट हेल्थ चेकअप के तौर पर करवाने को कहें उन्होंने सारे टेस्ट के साथ साथ अपना शुगर भी चेक करवा लिया उसमें फास्टिंग यानी वो ब्लड टेस्ट जो खाली पेट किया जाता है उसमें उनकी शुगर एक सौ चालीस आई अब जब से रिपोर्ट आई है उनके घरवाले डर गए है सब सूर्य को यही बोल रहे है की वो डाइअबीटीज़ की कगार पर हैं


 उन्होंने जब डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने बताया कि उन्हें प्री डायबिटीज़ है सूर्य ने इससे पहले प्री डायबिटीज़ के बारे में कभी नहीं सुना था उन्हें बस इतना पता था कि जिन लोगों की शुगर हाई होती है उनको डाइबिटीज़ होता है अब उन्हें इतने समय में कोई लक्षण भी महसूस नहीं हुए जिनको देखकर वो सतर्क हो जाते हैं डॉक्टर के पास चले जाते है पर अब जब से पता चला है कि वह डाइअबीटीज़ है, उन्होंने अपना खानपान थोड़ा ठीक कर लिया उस पर ध्यान देना शुरू कर दिया है एक्सरसाइज वगैरह भी शुरू कर दी है सूर्य चाहते हैं कि हम अपने शो पर प्री डायबिटीज़ के बारे में बात करें क्योंकि ज्यादातर लोगों को पता नहीं होता की वो डाइअबीटीज़  से पहले वाली स्टेज में है


सिम्स कोई लक्षण साफतौर पर पता नहीं चल पाते सूर्य यह भी जानना चाहते हैं कि क्या प्री डाइअबीटीज़ का मतलब ये पक्का है की उनको कुछ समय में डाइअबीटीज़ हो ही जाएगा? क्या इससे बचने का कोई उपाय नहीं है? ये सवालों के जवाब जानने डॉक्टर्स से और उससे पहले यह जान लीजिए प्रीडाइअबीटीज़ है क्या?

अगर डेफिनेशन के हिसाब से देखें तो ये वो वर्ग है जिन लोगों को फूल फ्लेक्स डाइअबीटीज़ नहीं होती अगर डेफिनेशन के हिसाब से देखे जिन लोगों का भी शुगर सौ से ज्यादा और एक सौ छब्बीस के बीच में यानी की एक सौ एक से लेके एक सौ पच्चीस के बीच में हो खाली पेट या खाना खाने के दो घंटे बाद एक सौ इकतालीस और एक सौ निन्यानवे के बीच में हो उनको हम प्री डायबिटिक कहते हैं अगर हम एचपीएमसी का क्राइटीरिया ले तो जो भी लोग पांच दशमलव. आठ से छह दशमलव चार के बीच में रहते हैं यानी की फाइव पॉइंट सिक्स पॉइंट फ़ोर के बीच परसेंटेज में रहते हैं जिनका एक जीवन सी इस बीच में होता है हम उसको भी प्री डाइअबीटीज़ कहते हैं देखा जाए तो फिर प्री डाइअबीटीज़ काफी लोगों में पाई जाती है लेकिन इसका कोई लक्षण नहीं होता ये बुखार नहीं है इसको लेके आप एकदम डॉक्टर के पास जाएंगे प्री डाइअबीटीज़ धीरे धीरे धीरे अगर इसका इलाज या इस कोडिंग से अड्रेस ना किया जाए डायबिटीज़ में तब्दील हो सकती है इसकी दर लगभग चार बीस प्रतिशत है अगर किसी भी व्यक्ति को प्री डायबिटीज़ है और वो पांच साल तक कोई अपना ध्यान नहीं रखता तो उसको डायबिटीज़ होने के चान्सेस लगभग चालीस प्रतिशत के करीब होते हैं 


इन लोगों को प्री डायबिटीज़ रहती है उनमें न्यूरोपैथी के सिम्पटम्स काफी पाए जाते हैं हार्ट डिजीज की इन्षुरेन्स भी ऐसे लोगों में ज्यादा पाए जाते हैं स्ट्रोक के इन्सिडेन्स भी ऐसे लोगों में ये ज्यादा पाए जाते हैं तो इस करके इस इस वर्ग के लोगों को जो प्री डायबिटीज़ है उनको इसको लाइटली नहीं लेना चाहिए, डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए और इसके ऊपर एक्शन करनी चाहिए ताकि इसको कंट्रोल में रखा जाए और कोई भी व्यक्ति प्री डायबिटीज़ डायबिटीज़ में कन्वर्ट ना हो 


आठ से चौदह घंटे की फास्टिंग के बाद सुबह किसी भी लेबोरेटरी में अपना वेलनेस ब्लड देख के सैंपल करवा सकते है अगर खाली पेट का सैंपल उसका रिपोर्ट एक सौ एक से एक सौ पच्चीस के बीच में आता है तो इसको प्री डायबिटीज़ कहते हैं वैसे ही खाना खाने यानी नाश्ता करने के दो घंटे बाद अपना सैंपल दुबारा रिपीट करिए अगर वो एक सौ चालीस और दो सौ के बीच बीच में आता है तो उसको प्रिऑरिटीज़ कहते हैं जो लोग एक सौ छब्बीस या उससे ज्यादा फास्टिंग में आते हैं उनको डायबिटीज़ कहते हैं वैसे ही खाना खाने के दो घंटे बाद का शुगर चेक किया जाए और वो दो सौ से ज्यादा हो तो उसको डायबिटीज़ कहते हैं ये तो हो गया फास्टिंग  क्राइटीरिया जहाँ तक एचबीएवनसी यानी विगत तीन महीने की शुगर एस्टिमेशन का सवाल है, उसमें बिलकुल सिंपल है 6.5 परसेंटेज के. ऊपर. डाइअबीटीज़ 5.7 या उससे नीचे उसको नॉन डायबिटिक और 5.8 से लेकर 6.4 इसके बीच में जो पेशेंट फ़ोन करेंगे उनको प्री डाइअबीटीज़ कहते हैं ये एक बहुत सरल क्राइटीरिया है इसमें कोई लंबा चोड़ा टेस्ट करने की जरूरत नहीं है सिंपल तीन टेस्ट करने से हमें पता लग जाता है कि प्री डायबिटीज़ किस किसको हम इस वर्ग में डाल सकते हैं 


प्री डायबिटीज़ इलाज


इसका इलाज बहुत सरल और सिंपल है इसमें लाइफ स्टाइल, मॉडिफिकेशन, खाने में परिवर्तन, रेगुलर एक्सर्साइज़, चीनी, उसका उससे बचाव, मैदा, ब्रेड, बिस्किट्स बिक्री वाली चीजें, इंस्टेंट फूड को बंद करना, अपने खाने में मिल इट्स की मात्रा बढ़ाना जैसे ज्वार, बाजरा इत्यादि इन चीजों का ज्यादा प्रयोग करना इससे काफी फरक आता है हमें कोशीश करनी चाहिए की प्री डायबिटीज़ को हम आगे ना बढ़ने दें और डायबिटीज़ में तब्दील ना होने दें इसके लिए प्रमुखता से अगर कोई अपना व्यक्ति ध्यान रखता है, रेगुलर एक्सरसाइज करता है, खान पान में ध्यान रखता है और डॉक्टर से मिल के इसके बारे में जानकारी लेता है तो निश्चित तौर पे डायबिटीज़ से बचा जा सकता है 


जैसे डॉक्टर सतीश ने बताया, आप प्री डाइबिटिक है या नहीं, यह जानने के लिए आपको एक बहुत ही सिंपल सा ब्लड टेस्ट करवाना होता है अगर आपको प्री डायबिटीज़ है तो जरूरी नहीं कि आगे जाकर डाइअबीटीज़ हो ही जाए, पर उसके लिए आपको अपना ध्यान रखना जरूरी है अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करना होगा और आप डायबिटीज़ से बच सकते हैं

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