पुरुष अपने शुक्राणु यानी स्पर्म को और महिला अपने अंडों को सालों तक फ्रीज करके रख सकते हैं और जब भी वो माँ बाप बनने की कोशीश करेंगे तो उस समय वो ये अंडा और स्पर्म इस्तेमाल कर सकते हैं आज हम बात करेंगे स्पर्म फ्रीज़िंग के बारे में सबसे पहले डॉक्टर से जानते हैं
स्पर्म फ्रीज़िंग है क्या?
स्पर्म फ्रीज़िंग यानी की शुक्राणु को फ्रीज करने का तरीका जिसकों कि क्रायोप्रेजर्वेशन भी कहा जाता है, एक ऐसा प्रोसीजर है जिससे भी कोई भी आदमी कुछ समय के बाद अपने ही स्पर्म यूज़ करके बायोलॉजिकल फादर बन सकता है यूश़ूअली या सीमन बैंक के अंदर स्पर्म को सब जीरो डिग्री टेम्परेचर माइनस वन नाइंटी सिक्स डिग्री माइनस टू हंड्रेड डिग्री टेम्प्रेचर पर स्पर्म को स्टोर किया जाता है और जब भी पेशेन्ट चाहे इसको ड्राइव कर सकता है और किसी भी बच्चे का बायोलॉजिकल फादर बन सकता है
स्पर्म फ्रीज़िंग क्यों की जाती हैं
देखिये कई बारी कुछ आदमी ऐसे हैं जिनको की किसी टाइप के कैंसर की शिकायत है जैसे कि टेस्ट के कैंसर की शिकायत है, प्रॉस्टेट की कैंसर की शिकायत है, उनको किसी रीज़न से कीमोथेरपी को करना पड़ रहा है बॉडी के किसी भी कैंसर की वजह से या फिर रेडिएशन थेरपी को करना पड़ रहा है ऐसे लोग उस समय अपना स्पर्म को प्रिजर्व कर सकते हैं
क्योंकि पता है ये चला गया है मेडिकल साइंस में की इन प्रोसीजर्स के बाद उनका स्पर्म का क्वालिटी बहुत ज्यादा डिटेलरेट होगा और इसकी वजह से आगे जाके शायद वो कुछ समय के बाद बायोलॉजिकल फादर ना बन पाए तो प्रोसीजर होने से पहले ही ऐसे लोग अपने स्पर्म को रिज़र्व या फ्रीज करवा सकते हैं कुछ ऐसे भी ऐसे सर्जरीज होती हैं जिनके अंदर एक्सपेक्टर है अगेन कि स्पर्म की क्वालिटी बहुत ज्यादा कमज़ोर हो जाएगी और आगे जाके बायोलॉजिकल फादर बनना शायद इम्पॉसिबल हो जाए ऐसे लोग भी अपने स्पर्म को प्रिजर्व कर सकते हैं
कई बार ही कुछ लोग बहुत ज्यादा हाई रिस्क जॉब में होते हैं जहाँ पे या फिर कुछ लोग ऐसे जॉब में होते हैं जिसमे की वो फैमिली से बहुत बहुत समय तक दूर रहते हैं और अपने पार्टनर के साथ प्रेगनेंसी टाइम पे प्लान नहीं कर सकते ऐसे लोग भी स्पर्म फ्रीज़िंग या फिर प्राइज रिजर्वेशन के प्रोसीजर के लिए जा सकते हैं
स्पर्म फ्रीज़िंग कैसे की जाती है
सबसे पहले आदमी का टेस्ट किया जाता है यह देखने के लिए कि कहीं उसके अंदर कोई सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन तो नहीं है क्योंकि यह इन्फेक्शन बच्चे को भी ट्रांसमिट हो सकती है स्पर्म के द्वारा तो या पार्टनर को भी इन्फैक्ट हो सकता है स्पर्म के द्वारा तो इन सबसे पहले आदमी का टेस्ट किया जाता है सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शंस को रोल आउट करने के लिए उसके बाद सैंपल कलेक्ट किया जाता है किसी भी स्वयं बैंक के अंदर और वो सैंपल लैब में प्रोसेसर किया जाता है
इन केस कोई पेशेंट सैंपल लैब में नहीं दे सकता तो वह घर से भी सैंपल कलेक्ट करके ला सकते हैं लेकिन इसका ट्रांसपोर्ट विद इन वन आर ऑफ कलेक्शन होना चाहिए क्योंकि उसके बाद स्पर्म की क्वालिटी बहुत ज्यादा डिटेल रेट होने शुरू हो जाती है तो एक बार आपने अपना सैंपल लैब में दे दिया उसके बाद स्पर्म को जो है वॉश करेंगे, उसको प्रिपेर करेंगे और उसको टेस्ट किया जाएगा उसकी क्वालिटी देखने के लिए, शुक्राणु का काउंट देखने के लिए मोटिलिटी देखने के लिए इन सब पैरामीटर्स के लिए स्पर्म की स्क्रीनिंग की जाती है उसकी क्वालिटीस एस की जाती है और उसके बाद ही स्वयं को जो है फ्रीज़ किया जाता है स्पर्म बैंक के अंदर माइनस वन नाइंटी सिक्स डिग्री टेम्प्रेचर पर जब तक कि पेशेंट उसको नैक्सट टाइम यूज़ ना करना चाहें
जब भी कोई पेशेंट स्वयं को यूज़ करना चाहते हैं बायोलॉजिकल फादर बनने के लिए अपने पार्टनर के साथ तो वो स्पर्म बैंक कॉन्टेक्ट करें स्पर्म बैंक जो है फोर्स पंप को तो करेगा यानी की उसको रूम टेम्प्रेचर पर लेके आएँगे और उसके बाद उसकी क्वालिटी को दोबारा से असेस किया जाता है देखिए ये जानना बहुत जरूरी है कि इस पंप को फ्रीज़िंग के बाद जब उसको थो किया जाता है या उसको रूम टेम्प्रेचर पर लेकर जाया जाता है तो डेफिनेटली बम का काउंट जो है, थोड़ा सा फल जरूर होता है इसलिए इनीशियली जरूरी यह है कि इस पंप जब भी कलेक्ट किए जाए वो किसी हैल्दी इंडीविजुअल के हों, जिसकी एज भी कम हो अप्रॉक्समट्ली फॉर्टी फॉर्टी फाइव इयर्स तक एज होनी चाहिए
डोनर की ताकि जब भी आप आठ साल दस साल के बाद जब भी इस पंप को यूज़ करे उसकी क्वालिटी अच्छी रहे और वो स्पर्म जो है आईवीएफ प्रोसीजर के लिए या फिर आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन प्रोसीजर के लिए यूज़ किया जाए और उसकी इफेक्टिवनेस अच्छी रहे एक बार इस पंप को असेस कर लिया क्वालिटी के लिए तो इस पंप को यूज़ कर सकते हैं डिफरेंट प्रोसीजर्स के लिए जैसे की मैंने बताया आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन या फिर टेस्ट ट्यूब बेबी प्रोसीजर के लिए एक ब्लॉग एक बहुत ज्यादा डाउट होता है पेशेंट्स के दिमाग में की इस फ्रोजन स्पर्म्स को अगर यूज़ करेंगे तो हो सकता है इसमें कुछ अब नॉर्मली हो, जिससे बच्चे के अंदर कोई जेनेटिक प्रॉब्लम आएगी या बच्चे के अंदर किसी टाइप की कंजनाइटल मलफोर्मेशन आएगी
लेकिन ऐसे इन चीजों में कोई भी सच्चाई नहीं है फ्रोजन स्पर्म्स यूज़ करने के बाद जो हैल्दी स्पर्म होते हैं, उसके अंदर बच्चे के अंदर कोई भी इस जेनेटिक प्रॉब्लम या फिर कंजनाइटल डिफेक्ट होने के चान्सेस बिल्कुल भी नहीं होते अगेन पेशेंट का एक सवाल होता है कि डॉक्टर इसको स्पर्म को फ्रीज करने के चार्जेज कितने होते हैं तो स्पर्म को फ्रीज करने के चान्सेस यूश़ूअली अच्छी लैब्स में दो से तीन हज़ार रुपए के करीब होता है
भाई साइंस में बड़ी तरक्की कर ली है उसी का एक फल है फ्रीजिंग जैसे डॉक्टर ऋतू ने बताया बहुत सारे कारण हैं जिनके चलते लोग अपने शुक्राणुओं को फ्रीज करवा लेते हैं और आगे जाकर जब भी वो चाहे बायोलॉजिकल तरीके से पिता भी बन सकते हैं उम्मीद है जिन लोगों को इसकी जरूरत है, यह जानकारी उनके काम आएगी